कैथल में फर्जी दस्तावेजों से जमीन हड़पने वाला रामानंद गिरफ्तार

मुख्य बिंदु:
  • एसीबी ने रामानंद को फर्जी दस्तावेजों से जमीन हड़पने के लिए गिरफ्तार किया।
  • 1961 में शरणार्थियों को दी गई जमीन में धोखाधड़ी हुई।
  • रामानंद ने समाज कल्याण अधिकारी के साथ मिलकर धोखाधड़ी की।
  • एक आरोपी सतनाम कामरा की गिरफ्तारी अभी बाकी है।
चंडीगढ़, 18 जून, 2025 – अंबाला भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) ने 18 जून, 2025 को कैथल के गांव बिरथे बाहरी निवासी रामानंद को फतेहबाद के झलानियां गांव से गिरफ्तार किया। रामानंद पर फर्जी दस्तावेजों के जरिए 18 कनाल 8 मरले जमीन हड़पने का आरोप है। उसे कैथल कोर्ट में पेश किया गया, जहां से उसे जिला जेल भेजा गया। यह कार्रवाई 1961 की सरकारी जमीन आवंटन योजना में धोखाधड़ी से जुड़ी है।

1961 की जमीन आवंटन योजना में धोखाधड़ी का खुलासा
1961 में हरियाणा सरकार ने कैथल के बिरथे बाहरी गांव में पाकिस्तान से आए शरणार्थियों और विमुक्त जातियों के लिए 649 एकड़, 4 कनाल, 17 मरले कृषि भूमि आवंटित की। कुछ परिवारों को 10 एकड़ और कुछ को 5 एकड़ जमीन बटाई पर दी गई। 1987 में सरकार ने बटाई हिस्सा न देने वालों की जमीन पात्र वारिसों को देने का आदेश दिया। तहसील कार्यालय ने इसके लिए कमेटी बनाई। कमेटी के सदस्य महेंद्र सिंह नंबरदार ने समाज कल्याण अधिकारियों के साथ मिलकर धोखाधड़ी की। उन्होंने 28 किले जमीन अपने, पत्नी जगवंत कौर और बेटे अशोक कुमार के नाम करवा लिए। यह धोखाधड़ी बिना पट्टेदारों के सहमति के हुई। स्थानीय लोग इस घटना से नाराज हैं। एक ग्रामीण ने कहा, “यह गरीबों का हक छीनना है।” एसीबी ने मामले की गहराई से जांच शुरू की। यह घटना सरकारी योजनाओं में भ्रष्टाचार को उजागर करती है।
रामानंद की फर्जी दस्तावेजों से जमीन हड़पने की साजिश
रामानंद ने जिला समाज कल्याण अधिकारी चांदी राम के साथ मिलकर 18 कनाल 8 मरले जमीन फर्जी दस्तावेजों से अपने नाम करवाई। यह धोखाधड़ी 1987 के आवंटन आदेशों का उल्लंघन थी। रामानंद ने पात्र शरणार्थियों के हक को छीना। एसीबी ने 7 अक्टूबर, 2022 को मामला दर्ज किया। यह मामला धारा 420, 467, 468, 471, 120-बी और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 13(2) के तहत दर्ज हुआ। रामानंद की गिरफ्तारी फतेहबाद से हुई। उसने अधिकारियों के साथ साठगांठ की थी। यह मामला कैथल में भ्रष्टाचार की जड़ों को दिखाता है। स्थानीय लोगों ने एसीबी की कार्रवाई की तारीफ की। एक ग्रामीण ने कहा, “न्याय मिलना चाहिए।” एसीबी ने अन्य आरोपियों की भी जांच तेज की। रामानंद की गिरफ्तारी ने क्षेत्र में हलचल मचा दी। यह कार्रवाई भ्रष्टाचार के खिलाफ कड़ा संदेश देती है। लोग अब सरकारी योजनाओं में पारदर्शिता की मांग कर रहे हैं।
अन्य आरोपियों की गिरफ्तारी और जांच की प्रगति
एसीबी ने इस मामले में अशोक कुमार और कान्ती देवी को पहले गिरफ्तार किया। कान्ती ने 12 कनाल 19 मरले जमीन फर्जी दस्तावेजों से हड़पी थी। अब केवल सतनाम कामरा, जिला कल्याण अधिकारी, की गिरफ्तारी बाकी है। एसीबी ने पुख्ता सबूत जुटाए हैं। मामला कैथल कोर्ट में चल रहा है। जांच में कई अधिकारियों की मिलीभगत सामने आई। यह मामला सरकारी योजनाओं में लापरवाही को उजागर करता है। स्थानीय लोग कोर्ट के फैसले का इंतजार कर रहे हैं। एक सामाजिक कार्यकर्ता ने कहा, “भ्रष्टाचार खत्म होना चाहिए।” एसीबी ने अन्य शिकायतों की जांच शुरू की। यह कार्रवाई शरणार्थियों के हक की रक्षा के लिए है। कैथल में भ्रष्टाचार के खिलाफ जागरूकता बढ़ी। लोग अब खुलकर शिकायत कर रहे हैं। यह मामला प्रशासन में सुधार की जरूरत को दर्शाता है। एसीबी की सक्रियता से लोगों में भरोसा बढ़ा। यह जांच भविष्य में ऐसी धोखाधड़ी रोकने में मदद करेगी। 
कैथल में भ्रष्टाचार के खिलाफ जागरूकता और सामाजिक प्रभाव
यह मामला कैथल में भ्रष्टाचार के खिलाफ जागरूकता बढ़ाने में कारगर रहा। स्थानीय संगठनों ने अभियान शुरू किए। ग्रामीणों ने पारदर्शिता की मांग की। शरणार्थी समुदाय ने इस धोखाधड़ी की निंदा की। एक शरणार्थी ने कहा, “हमारा हक छीना गया।” लोग अब एसीबी की हेल्पलाइन का उपयोग कर रहे हैं। सरकार ने डिजिटल भूमि रिकॉर्ड को बढ़ावा दिया। इससे धोखाधड़ी की संभावना कम होगी। कैथल में जागरूकता सेमिनार हो रहे हैं। यह मामला अन्य जिलों के लिए उदाहरण है। भ्रष्टाचार के खिलाफ सामूहिक प्रयास जरूरी है। एसीबी की कार्रवाई ने अधिकारियों को सतर्क किया। यह घटना सरकारी योजनाओं में सुधार की मांग को बल देती है। लोग भ्रष्टाचार के खिलाफ खुलकर बोल रहे हैं। यह कार्रवाई भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकेगी। कैथल में भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई तेज हुई। सामाजिक जागरूकता से प्रशासन पर दबाव बढ़ा। यह मामला शरणार्थियों के अधिकारों की रक्षा के लिए प्रेरणा है। 

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