कैथल के पूर्व पार्षद कमल मित्तल के खिलाफ कैथल कोर्ट में चालान दाखिल

मुख्य बिंदु:
  • एसीबी ने कमल मित्तल पर 9.2 लाख रुपये की रिश्वत लेने का आरोप लगाया।
  • मित्तल ने शोरूम तोड़ने की धमकी देकर रिश्वत मांगी।
  • स्टिंग ऑपरेशन में 4 लाख रुपये लेते रंगे हाथों पकड़ा गया।
  • कैथल कोर्ट में चालान जांच में महत्वपूर्ण कदम है।
चंडीगढ़: अंबाला भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) ने 16 जून, 2025 को कैथल नगर परिषद के पूर्व पार्षद कमल मित्तल के खिलाफ कैथल कोर्ट में चालान दाखिल किया। यह चालान भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की धारा 7ए और भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 308(2) के तहत दर्ज किया गया। यह मामला स्थानीय व्यापारी से रिश्वत वसूलने का है।

शिकायतकर्ता का शोरूम और पहली रिश्वत की मांग

2024 में एक स्थानीय व्यापारी ने कैथल के एसबीआई रोड पर पुराने बस स्टैंड के पास नगर परिषद से नक्शा पास करवाकर शोरूम बनाया। कमल मित्तल ने व्यापारी से संपर्क किया। उसने दावा किया कि शोरूम के खिलाफ मुख्यमंत्री विंडो और नगर परिषद में शिकायतें दर्ज की हैं। मित्तल ने इन शिकायतों को उपायुक्त तक पहुंचाने के लिए 5.2 लाख रुपये की रिश्वत मांगी। व्यापारी ने डर से रिश्वत दे दी। 17 मार्च, 2025 को नगर परिषद ने शोरूम सील कर दिया। व्यापारी ने सील हटाने के लिए आवेदन किया। 8 अप्रैल, 2025 को सील हटा दी गई। इस प्रकरण ने स्थानीय व्यापारियों में भय पैदा किया। मित्तल की हरकतों से व्यापारी परेशान था। उसने एसीबी से मदद मांगी। एसीबी ने मामले को गंभीरता से लिया। स्थानीय प्रशासन पर भी सवाल उठे। व्यापारी ने बताया कि मित्तल ने दबाव बनाया था। यह घटना कैथल में चर्चा का विषय बनी।

दूसरी रिश्वत मांग और स्टिंग ऑपरेशन
शोरूम की सील हटने के बाद मित्तल ने फिर व्यापारी से संपर्क किया। उसने शोरूम को अवैध बताया। मित्तल ने इसे तोड़ने की धमकी दी। उसने 4 लाख रुपये की रिश्वत मांगी। व्यापारी ने एसीबी को सूचना दी। एसीबी ने स्टिंग ऑपरेशन शुरू किया। 19 अप्रैल, 2025 को मित्तल को 4 लाख रुपये लेते रंगे हाथों पकड़ा गया। यह ऑपरेशन अंबाला एसीबी की बड़ी सफलता थी। मित्तल के खिलाफ मामला दर्ज हुआ। मामला संख्या 17 था। इसे भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम और बीएनएस के तहत दर्ज किया गया। स्थानीय लोग इस कार्रवाई से हैरान थे। मित्तल की गिरफ्तारी ने राजनीतिक हलकों में हलचल मचाई। व्यापारी ने राहत की सांस ली। एसीबी ने सबूत जुटाए। मित्तल के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग उठी। यह मामला भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई को मजबूत करता है। कैथल में ऐसी घटनाएं पहले भी चर्चा में रही हैं। “एसीबी की सतर्कता ने भ्रष्टाचार पर नकेल कसी,” एक स्थानीय व्यापारी ने कहा।

कोर्ट में चालान और जांच की प्रगति
16 जून, 2025 को एसीबी ने कैथल कोर्ट में चालान दाखिल किया। यह जांच में महत्वपूर्ण कदम था। चालान में मित्तल के खिलाफ पुख्ता सबूत पेश किए गए। कोर्ट अब मामले की सुनवाई करेगा। एसीबी ने व्यापारी के बयान दर्ज किए। मित्तल की हरकतों का पूरा विवरण जांच में शामिल है। स्थानीय लोग कोर्ट के फैसले का इंतजार कर रहे हैं। यह मामला कैथल में भ्रष्टाचार की गहरी जड़ों को उजागर करता है। मित्तल का राजनीतिक प्रभाव भी चर्चा में है। कुछ लोगों का मानना है कि मित्तल ने पहले भी ऐसी हरकतें की थीं। एसीबी ने अन्य शिकायतों की भी जांच शुरू की। “यह कार्रवाई भ्रष्टाचार के खिलाफ संदेश है,” एसीबी अधिकारी ने कहा। व्यापारी समुदाय ने एसीबी की तारीफ की। मामला अब कानूनी प्रक्रिया में है। मित्तल को सजा मिलने की उम्मीद है। यह घटना प्रशासन की पारदर्शिता पर सवाल उठाती है। कैथल में भ्रष्टाचार के खिलाफ जागरूकता बढ़ी है।

भ्रष्टाचार के खिलाफ सामाजिक जागरूकता और प्रभाव
यह मामला कैथल में भ्रष्टाचार के खिलाफ जागरूकता बढ़ाने में कारगर साबित हुआ। स्थानीय व्यापारियों ने एकजुट होकर भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाई। सामाजिक संगठनों ने एसीबी की कार्रवाई का समर्थन किया। कैथल में भ्रष्टाचार की कई घटनाएं पहले भी सामने आई हैं। मित्तल का मामला इनमें प्रमुख है। लोगों ने प्रशासन से पारदर्शिता की मांग की। कुछ स्थानीय नेताओं ने भी इसकी निंदा की। व्यापारियों ने भ्रष्टाचार के खिलाफ सेमिनार आयोजित किए। “हमें भ्रष्टाचार मुक्त समाज चाहिए,” एक संगठन के नेता ने कहा। मित्तल की गिरफ्तारी ने अन्य अधिकारियों को सतर्क किया। एसीबी ने भ्रष्टाचार की शिकायतों के लिए हेल्पलाइन शुरू की। कैथल के लोग अब खुलकर शिकायत कर रहे हैं। यह मामला अन्य जिलों के लिए भी उदाहरण है। भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई तेज हुई। सामाजिक जागरूकता से प्रशासन पर दबाव बढ़ा। मित्तल का मामला भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने में मदद करेगा।

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