मुख्य बिंदु :
- भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने भाजपा पर किसानों की एमएसपी मांगों की उपेक्षा का आरोप लगाया।
- किसानों को खाद की कमी के कारण कालाबाजारी का सामना करना पड़ रहा है।
- हरियाणा को जरूरी खाद स्टॉक का आधा भी नहीं मिला।
- कांग्रेस ने पंजाब के संघर्षरत किसानों के लिए तत्काल कार्रवाई की मांग की।
30 जून, 2025 को हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने भाजपा सरकार की कड़ी आलोचना की, क्योंकि किसान न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP), खाद और बीज के लिए जूझ रहे हैं। चंडीगढ़ में बोलते हुए, हुड्डा ने बताया कि खाद की भारी कमी के कारण पुलिस की निगरानी में किसानों को खाद लेने के लिए कतार लगानी पड़ रही है। “जब से भाजपा सत्ता में आई, मक्का और सूरजमुखी के लिए एमएसपी नहीं मिल रहा,” उन्होंने कहा। खाद की कमी ने कालाबाजारी को बढ़ावा दिया है, जिससे लागत बढ़ रही है और फसल उत्पादन कम हो रहा है।
हुड्डा ने 2024 की एक कृषि रिपोर्ट का हवाला दिया, जिसमें कहा गया कि 70% हरियाणा किसानों को खरीफ सीजन में खाद की कमी का सामना करना पड़ा। इससे फसलों की बिजाई चुनौतीपूर्ण हो गई है, और किसानों को वित्तीय नुकसान हो रहा है। उन्होंने भाजपा की “डबल इंजन” सरकार पर किसानों की परेशानियों को चार गुना करने का आरोप लगाया।
खाद संकट ने किसानों में व्यापक असंतोष पैदा किया है। हुड्डा ने बताया कि हरियाणा को 14 लाख मेट्रिक टन खाद की जरूरत थी, लेकिन केवल 6 लाख मेट्रिक टन उपलब्ध हुआ। इससे खरीफ की तैयारी प्रभावित हुई है। किसान महंगे दामों पर खाद खरीदने को मजबूर हैं, जिससे उनकी आजीविका पर असर पड़ रहा है। कांग्रेस नेता ने तत्काल सरकारी हस्तक्षेप की मांग की ताकि समय पर आपूर्ति और उचित एमएसपी लागू हो। किसान यूनियनों ने विरोध प्रदर्शन की योजना बनाई है, और हुड्डा की टिप्पणियां भाजपा की कृषि नीतियों पर बढ़ती चिंताओं को दर्शाती हैं।
भाजपा की निष्क्रियता से किसानों को खाद और एमएसपी की कमी का सामना
हुड्डा ने धान की रोपाई के मौसम में खाद संकट पर गंभीर चिंता जताई। “किसान खाद के लिए दर-दर भटक रहे हैं, और सरकार चुप बैठी है,” उन्होंने कहा। उन्होंने भाजपा पर समय रहते योजना न बनाने की आलोचना की, जिससे हर सीजन में कमी रहती है। ऐतिहासिक रूप से पहली बार, खाद थानों में बांटी जा रही है, और किसान, महिलाएं और बच्चे कई दिनों तक कतारों में इंतजार कर रहे हैं।
2023 के हरियाणा किसान सामूहिक सर्वेक्षण में 65% किसानों ने डीएपी और यूरिया तक पहुंच में देरी की शिकायत की। हुड्डा ने कहा कि यह कुप्रबंधन किसानों पर आर्थिक बोझ डालता है और उत्पादन को प्रभावित करता है। उन्होंने खाद वितरण को सुव्यवस्थित करने और एमएसपी लागू करने के लिए सुधारों की मांग की।
इसके अलावा, मक्का और सूरजमुखी लेकर मंडियों में पहुंचे किसान खरीद का इंतजार कर रहे हैं, क्योंकि सरकारी एजेंसियां एमएसपी पर खरीद नहीं कर रही हैं। हुड्डा ने बताया कि किसानों को एमएसपी से 1,000-1,500 रुपये कम पर फसल बेचनी पड़ रही है। “यह हरियाणा की पहली सरकार है, जिसके कार्यकाल में थानों में खाद बांटी गई,” उन्होंने कहा। किसान यूनियनों ने बेहतर खरीद प्रणाली की मांग के लिए विरोध की योजना बनाई है। हुड्डा ने जोर दिया कि हरियाणा के किसानों को समय पर समर्थन चाहिए, न कि खोखले वादे।
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