फसलों की एमएसपी नहीं मिल रही, डीएपी खाद की कालाबाजारी चरम पर

अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी की महासचिव, पूर्व केंद्रीय मंत्री और सिरसा की सांसद कुमारी सैलजा ने हरियाणा की भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि अपने आप को किसान हितैषी बताने वाली भाजपा सरकार वास्तव में किसान विरोधी है और उसने हमेशा किसानों के साथ वादाखिलाफी की है। किसी न किसी बहाने से किसानों का शोषण हो रहा है। फसलों का न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) तो दूर, किसानों को डीएपी खाद भी कालाबाजारी के जरिए खरीदनी पड़ रही है। सांसद ने सरकार से मांग की है कि डीएपी खाद की कालाबाजारी करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।

मीडिया को दिए बयान में कुमारी सैलजा ने कहा कि भाजपा की डबल इंजन सरकार के शासन में हरियाणा में लूट और शोषण का माहौल है। अन्नदाता किसान की लगातार अनदेखी हो रही है। किसानों को आज तक फसलों पर एमएसपी नहीं मिला है, वहीं नकली बीज, खाद और कीटनाशक उनकी कमर तोड़ रहे हैं।

इस समय सब्जी, धान, नरमा, कपास और अन्य फसलों की बुवाई चल रही है, जिनमें डीएपी खाद की जरूरत होती है। लेकिन अधिकारियों की लापरवाही और अनदेखी के कारण डीएपी खाद की कालाबाजारी जोरों पर है। एक बैग डीएपी खाद की सरकारी कीमत 1350 रुपये है, लेकिन सरकारी दुकानों पर खाद की कमी है या इसे चुनिंदा लोगों को दिया जा रहा है। नतीजतन, आम किसान प्राइवेट दुकानों से 1650 रुपये प्रति बैग की दर से खाद खरीदने को मजबूर है, यानी 300 रुपये प्रति बैग ज्यादा देना पड़ रहा है। प्रदेश के कई जिलों में डीएपी खाद की कमी है या यह कमी जानबूझकर पैदा की जा रही है ताकि किसानों को प्राइवेट दुकानों से कालाबाजारी में खाद खरीदने के लिए मजबूर किया जा सके।

कुमारी सैलजा ने कहा कि सब्जी, धान, नरमा और कपास उत्पादक किसानों को इस समय डीएपी खाद की सबसे ज्यादा जरूरत है। सरकारी दुकानों पर डीएपी उपलब्ध नहीं है, जबकि प्राइवेट दुकानों पर किसानों से मनमानी कीमत वसूलने के लिए खुलेआम बिक्री हो रही है। मुख्यमंत्री नायब सैनी और किसान विरोधी भाजपा ने हरियाणा के किसानों से किए गए हर वादे को धोखा साबित किया है। सांसद कुमारी सैलजा ने मुख्यमंत्री से मांग की है कि डीएपी खाद की कालाबाजारी के मामले की उच्च स्तरीय जांच कराकर दोषी दुकानदारों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। साथ ही, हर जिले में मांग के अनुसार डीएपी खाद की उपलब्धता सुनिश्चित की जाए और फसलों की एमएसपी पर कानून बनाकर किसानों के साथ न्याय किया जाए।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *