हरियाणा की बिजली वृद्धि से उद्योग चिंतित

मुख्य बिंदु :
• राष्ट्रीय जन उद्योग व्यापार संगठन ने हरियाणा की बिजली दर वृद्धि का विरोध किया।
• गुलशन डंग ने उच्च लागत से उद्योग पलायन की चेतावनी दी।
• बढ़ी दरों से उद्योगों पर सालाना 2100 करोड़ का बोझ पड़ेगा।
• पड़ोसी राज्यों में सस्ती बिजली उद्योगों को आकर्षित कर रही है।

राष्ट्रीय जन उद्योग व्यापार संगठन ने हरियाणा की हालिया बिजली दर वृद्धि का जोरदार विरोध किया है। हरियाणा विद्युत विनियामक आयोग ने अप्रैल में प्रति यूनिट 30 पैसे और प्रति केवीए शुल्क को 165 से 290 रुपये करने की घोषणा की। संगठन के प्रदेश अध्यक्ष गुलशन डंग का मानना है कि यह वृद्धि विनिर्माण इकाइयों को पलायन के लिए मजबूर कर सकती है। उन्होंने बताया कि हरियाणा की दरें पड़ोसी राज्यों से अधिक हैं। बार-बार मांगों और ज्ञापनों के बावजूद सरकार चुप है। डंग ने अधिकारियों और नेताओं की उदासीनता पर नाराजगी जताई। क्या यह उद्योगों को दूसरी जगह ले जाएगा? बढ़ती लागत हरियाणा के औद्योगिक विकास को खतरे में डालती है।

यह वृद्धि छोटे और मध्यम उद्योगों को सबसे ज्यादा प्रभावित करती है। 100 केवीए इकाई अब प्रति माह 15,500 रुपये अतिरिक्त देती है। मध्यम इकाइयों पर 40,000 रुपये से अधिक का बोझ पड़ता है। डंग ने अनुमान लगाया कि राज्य के उद्योगों पर सालाना 2100 करोड़ रुपये का बोझ पड़ेगा। व्यापारी दिल्ली और राजस्थान को बेहतर विकल्प मानते हैं। वहां प्रति केवीए शुल्क क्रमशः 125 और 160 रुपये है। क्या हरियाणा अपनी प्रतिस्पर्धा खो देगा? यह स्थिति उद्योगों को परेशान करती है।

पलायन का खतरा मंडराया

गुलशन डंग ने चेतावनी दी कि उच्च बिजली दरें उद्योगों को पलायन के लिए मजबूर कर सकती हैं। वे दिल्ली और राजस्थान की कम दरों को आकर्षक मानते हैं। यह वृद्धि निर्माताओं के लिए कठिन माहौल बनाती है। कई इकाइयां अतिरिक्त लागत सहन करने में असमर्थ हैं। डंग का कहना है कि यह धीरे-धीरे पलायन का कारण बनेगा। राज्य की उदासीनता इस जोखिम को बढ़ाती है। उद्योग हरियाणा की अर्थव्यवस्था में योगदान देते हैं। उनका जाना नौकरियों और राजस्व को नुकसान पहुंचाएगा। क्या यह राज्य के लिए मोड़ बन सकता है?

एक्स पोस्ट्स में व्यापारियों की बढ़ती चिंता दिखती है। वे सरकार से तत्काल कार्रवाई की मांग करते हैं। डंग ने प्रतिस्पर्धा बढ़ने की ओर ध्यान दिलाया। हरियाणा को अपने उद्योग बचाने चाहिए। क्या नेता समय रहते जवाब देंगे? अनिश्चितता व्यवसायों को अगला कदम सोचने पर मजबूर करती है।

आम आदमी और अर्थव्यवस्था पर असर
बिजली दर वृद्धि सिर्फ उद्योगों को प्रभावित नहीं करती। गुलशन डंग ने घरों पर इसके प्रभाव को रेखांकित किया। पहले परिवार 900-1000 रुपये का बिल देते थे, अब 4000-5000 रुपये चुकाना पड़ता है। यह वृद्धि आम नागरिकों पर भारी पड़ती है। साथ ही, उद्योगों की बढ़ी लागत महंगाई को बढ़ा सकती है। उत्पादन खर्च बढ़ने से कीमतें ऊंची हो सकती हैं। डंग ने इसे हरियाणा के लिए दोहरा झटका बताया। उन्होंने सरकार से वृद्धि वापस लेने की मांग की। संगठन चाहता है कि उद्योगों और जनता दोनों को राहत मिले।

डंग ने राज्य सरकार से त्वरित कदम उठाने की अपील की। वे दर वृद्धि रद्द करने की मांग करते हैं। बढ़ती जीवन लागत परिवारों पर दबाव डालती है। उद्योगों को भी प्रतिस्पर्धी रहने के लिए समर्थन चाहिए। क्या सरकार इस अपील पर ध्यान देगी? परिणाम हरियाणा के आर्थिक भविष्य को आकार दे सकता है। स्रोत बताते हैं कि जनता डंग के रुख का समर्थन बढ़ा रही है।
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