मुख्य बिंदू :
-
हुकटा ने चंडीगढ़ में शिक्षामंत्री महीपाल ढांडा को ज्ञापन सौंपा.
-
शिक्षक पात्र अनुबंधित असिस्टेंट प्रोफेसरों की नौकरी की सुरक्षा चाहते हैं.
-
मंत्री ने शिक्षकों की नौकरी बचाने का भरोसा दिलाया.
-
हुकटा ने नई भर्तियों से नौकरी जाने के डर को उठाया.
-
एसोसिएशन ने एक्सटेंशन लेक्चररों जैसी नीति की मांग की.
हरियाणा के विश्वविद्यालयों में शिक्षकों के लिए नौकरी की स्थिरता की मांग
24 जून 2025 को हरियाणा यूनिवर्सिटीज कांट्रैक्शन टीचर्स एसोसिएशन (हुकटा) ने चंडीगढ़ में शिक्षामंत्री महीपाल ढांडा से मुलाकात की। उन्होंने पात्र अनुबंधित अस्स्टेंट प्रोफेसरों की नौकरी की सुरक्षा के लिए एक ज्ञापन सौंपा। हुकटा ने मांग की कि नौकरी सुरक्षा कानून बनने तक किसी को हटाया न जाए। उन्होंने एक्सटेंशन लेक्चररों जैसा निर्देश जारी करने की अपील की। यह बैठक शिक्षकों की चिंताओं को दूर करने के लिए थी।
मंत्री ढांडा ने कहा, “हमारी सरकार पर भरोसा रखें, हम आपकी नौकरी बचाएंगे।” उन्होंने अधिकारियों से सुरक्षा पत्र जारी करने की बात कही। हुकटा ने इस मुद्दे की तात्कालिकता पर जोर दिया। यह कदम शिक्षकों के रोजगार की रक्षा के लिए है। यह नीति परिवर्तन की दिशा में एक बड़ा प्रयास है।
नई भर्तियों के बीच नौकरी की असुरक्षा को दूर करना
हुकटा ने एमडीयू रोहतक में नई भर्तियों पर चिंता जताई। इससे 65 अनुबंधित प्रोफेसरों की नौकरी खतरे में है। इंदिरा गांधी विश्वविद्यालय, मीरपुर रिवाड़ी में भी यही जोखिम है। शिक्षकों को डर है कि सुरक्षा उपायों से पहले नौकरी चली जाएगी। हुकटा ने तुरंत कार्रवाई की मांग की।
ज्ञापन में उनकी नौकरी की स्थिति की अस्पष्टता पर प्रकाश डाला गया। अनुबंधित शिक्षक वर्षों की सेवा के बावजूद असुरक्षित महसूस करते हैं। हुकटा इस अंतर को पाटना चाहता है। एक्सटेंशन लेक्चररों की तरह नीति की मांग है। यह मुद्दा उच्च शिक्षा में स्थिर रोजगार की जरूरत को दर्शाता है।
हरियाणा में शिक्षकों के कल्याण के लिए सरकार की प्रतिबद्धता
मंत्री ढांडा का आश्वासन सरकार की शिक्षकों के समर्थन की मंशा दिखाता है। उन्होंने हरियाणा के विश्वविद्यालयों में उनके योगदान को सराहा। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के वादे के अनुसार, नौकरी सुरक्षा की फाइल पर काम चल रहा है। यह भरोसा शिक्षकों का हौसला बढ़ाता है। लेकिन समय पर कार्रवाई जरूरी है।
हुकटा का मंत्री से संवाद सरकार की सक्रियता में विश्वास दर्शाता है। एसोसिएशन को मानसून सत्र से पहले समाधान की उम्मीद है। शिक्षक लंबी अवधि की स्थिरता की नीति चाहते हैं। सरकार का जवाब उच्च शिक्षा के भविष्य को प्रभावित करेगा। यह मुद्दा पूरे राज्य के शिक्षकों से जुड़ा है।
शिक्षकों की एकता से नीति परिवर्तन की वकालत मजबूत
चंडीगढ़ बैठक में हुकटा का नेतृत्व डॉ. विजय मलिक और डॉ. पुलकित बेरवाल ने किया। एमडीयू रोहतक से डॉ. रवीश कुमार और डॉ. रविंद्र कुंडु मौजूद थे। उनकी एकता नौकरी के अधिकारों की रक्षा के संकल्प को दिखाती है। हुकटा का सक्रिय रवैया शिक्षकों की आवाज को बुलंद करता है। यह सुधार की उम्मीद जगाता है।
हुकटा की कोशिशें बैठकों से आगे बढ़कर समर्थन जुटाती हैं। ज्ञापन सौंपना नीति को प्रभावित करने की रणनीति है। एक्स पोस्ट्स के अनुसार, नौकरी के नुकसान की चिंता बढ़ रही है। उनकी वकालत दूसरों को प्रेरित कर सकती है। इस अभियान का परिणाम कई शिक्षकों के भविष्य को प्रभावित करेगा।







