कुल्लू के इस स्कूल के छात्र नहीं बता पाए देश की राजधानी, राष्ट्रपति का नाम

मुख्य बिंदु:
  • सीएम सुखविंदर सिंह सुखु ने कुल्लू के स्कूल का औचक दौरा किया।
  • कक्षा 10 के छात्रों ने राष्ट्रीय राजधानी, राष्ट्रपति का नाम गलत बताया।
  • प्रिंसिपल को दैनिक सामान्य ज्ञान कक्षाएँ शुरू करने का निर्देश।
  • सरकार ने स्कूल भवन, शिक्षा गुणवत्ता को बेहतर करने का वादा किया।
  • शिक्षकों की कार्यकुशलता पर भी सवाल उठे।

     


मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुखु ने बुधवार को कुल्लू जिले के निर्मंड उपमंडल में बागा सराहन सरकारी वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय का औचक दौरा किया। कक्षा 10 के छात्र भारत की राष्ट्रीय राजधानी और राष्ट्रपति का नाम सही नहीं बता पाए, कुछ ने राजधानी को शिमला बताया।
सुखु ने प्रिंसिपल और शिक्षकों को फटकार लगाई और प्रतिदिन आधे घंटे की सामान्य ज्ञान कक्षाएँ शुरू करने का निर्देश दिया। उन्होंने शिक्षकों से प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए व्यावहारिक ज्ञान देने को कहा।
यह घटना ग्रामीण शिक्षा की कमियों को उजागर करती है। सीएम ने प्री-नर्सरी से कक्षा 8 तक के पुराने स्कूल भवन को उन्नत करने का वादा किया। स्थानीय समाचारों के अनुसार, शिक्षा विभाग अब अन्य स्कूलों की जाँच कर रहा है। 
शिक्षकों की जवाबदेही तह हो, सालाना इंक्रीमेंट को छात्रों के परिणाम से जोड़ा जाए

बागा सराहन स्कूल की घटना ने न केवल छात्रों के सामान्य ज्ञान पर सवाल उठाए, बल्कि हजारों रुपये वेतन पाने वाले शिक्षकों की कार्यकुशलता पर भी उंगली उठाई। सीएम के आकलन से स्पष्ट है कि कई शिक्षक केवल वेतन पर ध्यान देते हैं, न कि छात्रों की प्रगति पर। सरकारी स्कूलों में शिक्षक अक्सर स्टाफ रूम में गपशप करते या रील बनाते नजर आते हैं।
यह घटना एक उदाहरण मात्र है; अन्य स्कूलों के छात्रों का ज्ञान भी इससे बेहतर नहीं हो सकता। सरकार को सामान्य ज्ञान को पाठ्यक्रम में प्राथमिकता देनी चाहिए ताकि छात्र भविष्य में बेरोजगारी का शिकार न हों। शिक्षकों की वार्षिक वेतन वृद्धि को प्रदर्शन-आधारित परीक्षा से जोड़ा जाना चाहिए। इससे निष्क्रिय शिक्षक समय के साथ खुद को ढालेंगे और चुस्त रहेंगे।

सामुदायिक सहभागिता से होगा शिक्षा में सुधार

इस घटना ने अभिभावकों और समुदाय को स्कूलों में जवाबदेही की मांग के लिए प्रेरित किया। अभिभावक-शिक्षक संघ बनाने की मांग बढ़ रही है। सामुदायिक स्तर पर अतिरिक्त कक्षाएँ शुरू हो रही हैं। सरकार ने अभिभावकों की भागीदारी बढ़ाने के लिए जागरूकता अभियान शुरू किए। स्था
नीय नेता व्यावहारिक शिक्षा को पाठ्यक्रम में शामिल करने की वकालत कर रहे हैं। सहयोगी प्रयास बेहतर शिक्षण वातावरण बनाएंगे। सीएम ने शिक्षकों को छात्रों को सूचित नागरिक बनाने पर जोर दिया। यह घटना शिक्षा प्रणाली में सुधार के लिए सामुदायिक समर्थन और बुनियादी ढांचे के उन्नयन की आवश्यकता को दर्शाती है। सरकार और समुदाय मिलकर हिमाचल की शिक्षा को मजबूत कर सकते हैं।

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