मुख्यमंत्री सुक्खू ने बागा-सराहन में शुरू किया ‘सरकार गांव के द्वार’

मुख्य बिंदु :
  • मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने कुल्लू के बागा-सराहन में कार्यक्रम की अध्यक्षता की।
  • ‘सरकार गांव के द्वार’ से ग्रामीणों की समस्याओं का मौके पर समाधान।
  • सरकार ने स्वरोजगार और कल्याणकारी योजनाओं पर दिया जोर।
  • सांस्कृतिक कार्यक्रमों से ग्रामीणों को योजनाओं की जानकारी दी गई।
ग्रामीण समस्याओं का त्वरित समाधान: ‘सरकार गांव के द्वार’ पहल

मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने मंगलवार को कुल्लू जिले के आनी क्षेत्र में बागा-सराहन गांव में ‘सरकार गांव के द्वार’ कार्यक्रम का नेतृत्व किया। उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य हर क्षेत्र का समान विकास सुनिश्चित करना है। इसके लिए कई कल्याणकारी योजनाएं और महत्वाकांक्षी कार्यक्रम शुरू किए गए हैं। इस पहल के तहत ग्रामीणों की समस्याओं का समाधान उनके गांव में ही किया जा रहा है। यह कार्यक्रम ग्रामीणों को जिला या राज्य मुख्यालय तक लंबी यात्रा से बचाता है। इससे उनका समय और पैसा दोनों बच रहे हैं। सरकार की यह अनूठी पहल लोगों के जीवन को सरल बनाने में मदद कर रही है।

 

दुर्गम क्षेत्रों तक पहुंच रही सरकार

मुख्यमंत्री ने बताया कि ‘सरकार गांव के द्वार’ कार्यक्रम पहले डोडरा क्वार, कुपवी, किलाड़ और शरची जैसे दुर्गम क्षेत्रों में आयोजित हो चुका है। वे स्वयं और उनके मंत्रिमंडल के सहयोगी गांव-गांव जाकर लोगों से सीधा संवाद कर रहे हैं। सुक्खू ने कहा, “मैं रात गांव में रुकता हूं ताकि लोगों की समस्याओं को गहराई से समझ सकूं।” यह पहल खासकर उन क्षेत्रों के लिए वरदान साबित हो रही है, जहां सरकारी सेवाएं पहुंचना मुश्किल है। ग्रामीणों को अब छोटी-छोटी समस्याओं के लिए दूर नहीं जाना पड़ता। सरकार उनकी सुविधा के लिए उनके द्वार पर पहुंच रही है।

 

युवाओं को स्वरोजगार और नशा मुक्ति का आह्वान
मुख्यमंत्री ने युवाओं से सरकार द्वारा शुरू किए गए स्वरोजगार के अवसरों का लाभ उठाने की अपील की। उन्होंने कहा कि ये अवसर युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने में मदद करेंगे। साथ ही, उन्होंने नशे जैसी सामाजिक बुराई से दूर रहने का आह्वान किया। कार्यक्रम में सूचना एवं जन संपर्क विभाग के कलाकारों ने सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से सरकारी योजनाओं की जानकारी दी। इन प्रस्तुतियों ने ग्रामीणों को जागरूक करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। यह आयोजन ग्रामीणों और सरकार के बीच संवाद का मजबूत माध्यम बना।

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