सड़क किनारे वन भूमि विकास कार्यों में बन रही बाधा :सैलजा

मुख्य बिंदु :
  • कुमारी सैलजा ने वन भूमि नियमों से विकास कार्यों में रुकावट की चिंता जताई।
  • केंद्रीय मंत्री ने कहा, बुनियादी ढांचा कार्यों के लिए अनुमति उपलब्ध है।
  • सैलजा ने सड़क किनारे की वन भूमि को डी-नोटिफाई करने की मांग की।
  • सिरसा में वन विभाग ने 90 लाख रुपये की मांग की।
सिरसा की सांसद कुमारी सैलजा ने शहरी विकास में वन भूमि नियमों से उत्पन्न बाधाओं पर सवाल उठाए। उन्होंने केंद्रीय वन मंत्री भूपेंद्र यादव को पत्र लिखकर बताया कि सड़कों के किनारे वन भूमि के रूप में चिह्नित क्षेत्र, जहां कोई जंगल नहीं है, विकास कार्यों को रोक रहे हैं। सिरसा में एनएच-9 पर सीवर लाइन, जलापूर्ति पाइपलाइन और टाइलिंग जैसे कार्य प्रभावित हो रहे हैं।
यह समस्या हरियाणा सहित कई राज्यों में है, जिससे करोड़ों रुपये की योजनाएं अटक रही हैं। सैलजा ने कहा, “नागरिक सुविधाओं से वंचित हैं।” उन्होंने इन भूमियों को डी-नोटिफाई कर नगर परिषदों को सौंपने की मांग की।
उन्होंने कहा कि पुराने नियम शहरी विकास को रोक रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि पर्यावरण और विकास के बीच संतुलन जरूरी है। सैलजा ने वन कानूनों में संशोधन की मांग की ताकि जनहित में कार्य तेजी से हो सकें।
केंद्रीय मंत्री ने दी अनुमतियों की जानकारी, पर विवाद बरकरार
केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव ने 23 जून 2025 को जवाब में कहा कि 23 नवंबर 2023 के दिशानिर्देशों के अनुसार, सड़कों के राइट ऑफ वे में ऑप्टिकल फाइबर, जल पाइपलाइन और बिजली लाइनों जैसे कार्यों के लिए वन विभाग से अनुमति ली जा सकती है। राष्ट्रीय उद्यान या वन्यजीव अभयारण्यों के पास के क्षेत्रों के लिए राज्य वन्यजीव बोर्ड की मंजूरी जरूरी है।
हालांकि, सैलजा ने बताया कि सिरसा में वन विभाग ने नगर परिषद से 90 लाख रुपये की मांग की है। उन्होंने कहा, “यह अन्यायपूर्ण है।” उन्होंने केंद्र और राज्य सरकारों से इस मुद्दे पर तत्काल कार्रवाई की मांग की।
स्थानीय नेताओं का कहना है कि यह नियम विकास को धीमा कर रहे हैं। सैलजा ने सुझाव दिया कि सरकार अदालत से अनुमति लेकर डी-नोटिफिकेशन प्रक्रिया तेज करे।
राज्य सरकार से समन्वय की मांग, जनहित पर जोर
सैलजा ने हरियाणा सरकार से वन विभाग और नगर परिषदों के बीच समन्वय स्थापित करने को कहा। सिरसा में 90 लाख रुपये की मांग इस बात का उदाहरण है कि वित्तीय विवाद विकास को रोक रहे हैं। उन्होंने कहा, “विकास कार्य रुकना जनता के साथ अन्याय है।”
अन्य शहरी क्षेत्रों में भी ऐसी समस्याएं हैं, जिससे बुनियादी ढांचा परियोजनाएं प्रभावित हो रही हैं। सैलजा ने केंद्र से वन नियमों की समीक्षा और डी-नोटिफिकेशन के लिए नीति बनाने की मांग की। स्थानीय निवासियों का कहना है, “हमें सुविधाएं चाहिए, कि बाधाएं।”
सैलजा का यह प्रयास शहरी विकास को गति देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। विशेषज्ञों का मानना है कि नीतिगत सुधारों से यह समस्या हल हो सकती है।

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