मुख्य बिंदु:
- अनिल विज ने भारत के घोड़ों और पाकिस्तान के गधों की प्रसिद्धि पर जोर दिया।
- पाकिस्तान के 60.47 लाख गधे चीन के साथ एजियाओ व्यापार को बढ़ावा देते हैं।
- भारत के मारवाड़ी, काठियावाड़ी घोड़े ऐतिहासिक महत्व के लिए प्रसिद्ध हैं।
- विज ने पाकिस्तान-चीन दोस्ती को गधों के व्यापार से जोड़ा।
भारत के प्रतिष्ठित घोड़े बनाम पाकिस्तान का गधा व्यापार उछाल1 जुलाई, 2025 को, हरियाणा के ऊर्जा मंत्री अनिल विज ने चंडीगढ़ में पत्रकारों से बातचीत में भारत के घोड़ों और पाकिस्तान के गधों की तुलना कर सुर्खियां बटोरीं।
“भारत के घोड़े और पाकिस्तान के गधे विश्व प्रसिद्ध हैं,” विज ने मजाक में कहा। उन्होंने बताया कि 2024 की FAO रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान के 60.47 लाख गधे, दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी गधा आबादी, चीन के साथ एजियाओ दवा व्यापार को बढ़ावा देते हैं।
भारत में मारवाड़ी और काठियावाड़ी जैसी नस्लें अपनी ताकत और ऐतिहासिक भूमिका के लिए मशहूर हैं। विज ने महाराणा प्रताप के घोड़े चेतक का जिक्र किया। उनके बयान ने पाकिस्तान-चीन संबंधों को गधा व्यापार से जोड़ा, जिससे हंसी के साथ सांस्कृतिक अंतर भी उजागर हुआ।भारत का घोड़ा इतिहास, मारवाड़ी की शान से लेकर भूटिया की सहनशक्ति तक, गर्व का प्रतीक है। विज के बयान जानवरों की राष्ट्रीय पहचान को दर्शाते हैं।
जानवरों के व्यापार के पीछे आर्थिक और सांस्कृतिक कहानियां
विज के बयानों ने पाकिस्तान के गधा व्यापार पर रोशनी डाली, जहां 60.47 लाख गधे चीन के $3 बिलियन एजियाओ उद्योग को समर्थन देते हैं, जैसा कि 2023 की व्यापार रिपोर्ट में है।
“पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था गधों पर टिकी है,” विज ने मजाक किया। भारत में मारवाड़ी और मणिपुरी जैसे घोड़े सांस्कृतिक महत्व के लिए प्रसिद्ध हैं।मारवाड़ी घोड़े बाजार में 50 लाख तक बिकते हैं।
चेतक और शिवाजी का घोड़ा कृष्णा लोककथाओं में अमर हैं। विज ने पाकिस्तान-चीन संबंधों को गधा व्यापार से जोड़ा, जिससे सांस्कृतिक अंतर उजागर हुआ।2024 की साउथ एशिया इकॉनॉमिक जर्नल रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान के गधा निर्यात 2020 से 20% बढ़े हैं।
भारत का घोड़ा उद्योग विरासत संरक्षण पर केंद्रित है। विज के बयान राष्ट्रीय गर्व और अर्थव्यवस्था पर चिंतन की मांग करते हैं।भारत को अपनी घोड़ा विरासत को संरक्षित करने के लिए नीतियां बनानी चाहिए। यह मामला सांस्कृतिक और आर्थिक पहचानों को दर्शाता है।








