हरियाणा: बीमा कंपनियों ने कपास उत्पादकों को लगाया करोड़ों का चूना

सरकार ,बीमा कंपनियों ने हरियाणा के कपास उत्पादकों को लगाया करोड़ों का चूना

हरियाणा के कपास किसानों के बीमा दावे को ₹281 करोड़ से घटाकर ₹80 करोड़ किया, किसानों ने लगाया धोखाधड़ी का आरोप

भिवानी/चरखी दादरी: हरियाणा के भिवानी और चरखी दादरी जिलों के कपास किसानों ने राज्य सरकार और एक बीमा कंपनी पर मिलीभगत कर उन्हें प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY) के तहत मिलने वाले मुआवजे से वंचित करने का आरोप लगाया है। फसल कटाई प्रयोग (CCE) के आधार पर ₹281.5 करोड़ का बीमा दावा तय किया गया था, लेकिन बाद में इसे घटाकर महज ₹80 करोड़ कर दिया गया। किसानों का आरोप है कि यह फैसला एक अवैध सलाहकार समिति द्वारा लिया गया, जिसका कार्यकाल पहले ही समाप्त हो चुका था।

किसान कार्यकर्ताओं ने इस मामले में राज्य सरकार को शिकायत सौंपी है, जिसमें कहा गया है कि बीमा कंपनी ने उच्च अधिकारियों से संपर्क कर इस दावे को चुनौती दी, जिसके बाद मामला राज्य तकनीकी सलाहकार समिति (STAC) को भेज दिया गया। इस समिति ने “तकनीकी उपज मूल्यांकन” के आधार पर बीमा राशि तय करने की मंजूरी दी, जिससे दावा राशि में भारी कटौती कर दी गई। इस फैसले के बाद किसानों में जबरदस्त आक्रोश है।

निष्क्रिय समिति की बैठक बुलाकर बीमा दावे में कटौती:

किसान कार्यकर्ता डॉ. राम कंवर का कहना है कि जब STAC ने इस फैसले को मंजूरी दी, तब इसकी कोई कानूनी मान्यता नहीं थी। यह समिति 1 अगस्त 2024 को भंग हो चुकी थी, लेकिन कृषि निदेशक राजनारायण कौशिक और संयुक्त निदेशक (सांख्यिकी) राजीव मिश्रा ने 20 अगस्त 2024 को इस निष्क्रिय समिति की बैठक बुलाकर बीमा दावे में कटौती का निर्णय लिया। कार्यकर्ताओं का कहना है कि जब समिति का कार्यकाल समाप्त हो चुका था, तो इसका लिया गया कोई भी निर्णय वैध नहीं माना जा सकता

भिवानी जिले के सिवानी तहसील में स्थिति और भी गंभीर हो गई है, जहां पहले 34 गांवों के किसानों को बीमा दावा मिलना था। लेकिन तकनीकी मूल्यांकन के बाद करीब 20 गांवों को पूरी तरह से मुआवजे से वंचित कर दिया गया। क्षेत्र के किसान कार्यकर्ता दयानंद पुनिया ने आरोप लगाया कि बीमा कंपनी ने सरकारी अधिकारियों के साथ मिलकर इस प्रक्रिया में हेरफेर की

पुनिया का कहना है कि किसानों ने अपनी फसल का बीमा करवाया था, जिसके बाद कृषि विभाग ने गांववार फसल कटाई प्रयोग (CCE) के जरिए प्रति एकड़ मुआवजा तय किया था। लेकिन बीमा कंपनी ने इस रिपोर्ट को खारिज कर दिया और दावा किया कि सैटेलाइट इमेजरी के आधार पर फसलों को ज्यादा नुकसान नहीं हुआ। किसानों ने इस दावे को गलत बताते हुए इसे बड़ी धोखाधड़ी करार दिया

भिवानी की जिला स्तरीय निगरानी समिति (DLMC), जिसकी अध्यक्षता उपायुक्त करते हैं, ने पहले ही बीमा कंपनी की आपत्तियों को खारिज कर दिया था और सात दिनों के भीतर भुगतान करने का निर्देश दिया था। लेकिन बीमा कंपनी ने इस आदेश को मानने के बजाय, इसे कृषि एवं किसान कल्याण निदेशक के समक्ष चुनौती दी। इस मामले में कृषि निदेशक से प्रतिक्रिया लेने की कोशिश की गई, लेकिन उन्होंने कॉल और मैसेज का कोई जवाब नहीं दिया।

10 मार्च को सिवानी एसडीएम कार्यालय पर प्रदर्शन :

बढ़ते आक्रोश के बीच, किसानों ने विरोध प्रदर्शन तेज करने का फैसला किया है10 मार्च को सिवानी एसडीएम कार्यालय पर प्रदर्शन करने की घोषणा की गई है, जिसमें किसानों की मांग है कि मुख्यमंत्री इस मामले में तत्काल हस्तक्षेप करें। किसान कार्यकर्ताओं की शिकायत में घोटाले में शामिल अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग की गई है और पहले से तय ₹281.5 करोड़ की पूरी बीमा राशि जारी करने की अपील की गई है

चुनाव नजदीक होने के चलते यह मुद्दा अब राजनीतिक तूल पकड़ रहा है, जिससे सरकार पर किसानों की समस्याओं का समाधान करने का दबाव बढ़ता जा रहा है।

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