मुख्य बिंदु :
- हिमाचल स्काउट्स एंड गाइड्स ने सुन्नी के माया पब्लिक स्कूल में कार्यशाला आयोजित की।
- राजेश कुमार ने स्काउटिंग की निस्वार्थ सेवा को बढ़ावा देने में भूमिका पर जोर दिया।
- धनेंद्र वशिष्ठ ने छात्रों के लिए लचीलापन प्रशिक्षण पर प्रकाश डाला।
स्काउटिंग की शुरुआत 1907 में हुई जब ब्रिटिश सेना अधिकारी रॉबर्ट बैडेन-पॉवेल ने यूके के ब्राउनसी द्वीप पर एक शिविर आयोजित किया। उनकी किताब, Scouting for Boys, ने एक वैश्विक आंदोलन शुरू किया, जो अब 170 से अधिक देशों में सक्रिय है। स्काउटिंग नेतृत्व, टीमवर्क, और लचीलापन को बढ़ावा देती है। राष्ट्रीय शिक्षा बोर्ड की 2024 की रिपोर्ट के अनुसार, स्काउटिंग समस्या-समाधान कौशल को 30% बढ़ाती है। यह ईमानदारी और सेवा जैसे मूल्यों को सिखाती है। भारत में स्काउटिंग 1909 में शुरू हुई, जो अब लाखों की संख्या में फैल चुकी है। शिविर और सामुदायिक सेवा जैसे कार्यक्रम आत्मविश्वास और नैतिक निर्णय लेने की क्षमता विकसित करते हैं। स्काउटिंग शारीरिक फिटनेस और पर्यावरण जागरूकता को प्रोत्साहित करती है। यह सदी पुराना आंदोलन युवाओं को एकता और व्यक्तिगत विकास के लिए सशक्त बनाता है।
स्काउटिंग युवाओं को जीवन कौशल सिखाती है
स्काउटिंग कई लाभ प्रदान करती है, जो युवाओं को जीवन कौशल सिखाती है। यह समूह गतिविधियों के माध्यम से नेतृत्व कौशल विकसित करती है। शिविर और सामुदायिक परियोजनाएं टीमवर्क को बढ़ावा देती हैं। स्काउटिंग लचीलापन सिखाती है, जिससे छात्र आत्मविश्वास के साथ कठिनाइयों का सामना करते हैं।
2023 की युवा विकास रिपोर्ट के अनुसार, स्काउट्स में नैतिक व्यवहार की संभावना 25% अधिक होती है। प्राथमिक चिकित्सा और नेविगेशन जैसे कौशल आपातकाल के लिए तैयार करते हैं। स्काउटिंग ईमानदारी, सम्मान, और सेवा जैसे मूल्यों को बढ़ावा देती है। यह बैज अर्जन के माध्यम से आत्मसम्मान बढ़ाती है। पर्यावरण संरक्षण पर जोर देती है। स्काउटिंग अनुकूलनशीलता और समस्या-समाधान सिखाती है। ये कौशल व्यक्तिगत विकास और सामुदायिक बंधन को मजबूत करते हैं। स्काउटिंग राष्ट्रीय गौरव और एकता को बढ़ावा देती है।
सुन्नी के माया पब्लिक सीनियर सेकेंडरी स्कूल में “सबके लिए स्काउटिंग” थीम पर कार्यशाला
2 जुलाई, 2025 को हिंदुस्तान स्काउट्स एंड गाइड्स, हिमाचल ने सुन्नी के माया पब्लिक सीनियर सेकेंडरी स्कूल में “सबके लिए स्काउटिंग” थीम पर कार्यशाला आयोजित की। इसका उद्देश्य स्काउटिंग के मूल्यों को प्रेरित करना था। मुख्य अतिथि राजेश कुमार ने कहा, “स्काउटिंग निस्वार्थ सेवा और चरित्र निर्माण को बढ़ावा देती है।” राज्य आयुक्त धनेंद्र वशिष्ठ ने लचीलापन प्रशिक्षण पर जोर दिया। “स्काउटिंग युवाओं को जीवन की चुनौतियों के लिए तैयार करती है,” उन्होंने कहा। कार्यशाला में रस्सी बांधने और प्राथमिक चिकित्सा सत्र शामिल थे, जिन्हें रूबी ने संचालित किया। 100 से अधिक छात्रों ने भविष्य की स्काउटिंग गतिविधियों के लिए उत्साह दिखाया। प्रधानाचार्य डॉ. हरीश शर्मा ने अतिथियों का स्वागत किया। यह आयोजन हिमाचल की युवा सशक्तिकरण की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
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