हिमाचल प्रदेश सरकार ने प्रशासनिक सीमाओं की समीक्षा के लिए एक आयोग गठित किया है। इसमें नए जिलों के गठन की संभावना भी शामिल है। इस कदम पर विपक्ष ने तीखी प्रतिक्रिया दी है।
मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने कहा कि कोई भी फैसला भौगोलिक स्थिति, आबादी और क्षेत्रों की दुर्गमता के आधार पर लिया जाएगा। उन्होंने कहा, “हमने आयोग गठित किया है। यह हर ब्लॉक, तहसील और जिले का भौगोलिक और जनसांख्यिकीय आधार पर अध्ययन करेगा। उसके बाद जरूरत पड़ी तो जिलों, तहसीलों, एसडीएम क्षेत्रों और ब्लॉकों का पुनर्गठन किया जाएगा।”
चार सदस्यीय आयोग की अध्यक्षता हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश धर्म चंद चौधरी कर रहे हैं। अन्य सदस्यों में अधिवक्ता विशाल पंवार और सेवानिवृत्त आईएफएस अधिकारी राजेश शर्मा शामिल हैं। भू-अभिलेख निदेशक सदस्य सचिव हैं। आयोग की अधिसूचना 14 अक्टूबर को जारी हुई थी और इसे छह महीने में रिपोर्ट सौंपनी है। यह जिलों, उपमंडलों, तहसीलों और विकास खंडों के गठन, विलय या विभाजन की जांच करेगा।
यह 54 साल बाद राज्य के प्रशासनिक नक्शे में बड़े बदलाव की पहली कोशिश है। आखिरी बार 1 सितंबर 1972 को कांगड़ा का विभाजन कर जिलों की संख्या नौ से बढ़ाकर मौजूदा 12 की गई थी। कांगड़ा से नूरपुर, देहरा और पालमपुर जैसे नए जिले बनाने की लंबे समय से मांग है। मंडी और शिमला के कुछ क्षेत्रों से भी ऐसी मांगें उठती रही हैं। देहरा कांग्रेस विधायक कमलेश ठाकुर का विधानसभा क्षेत्र है, जो मुख्यमंत्री की पत्नी हैं।
नेता प्रतिपक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने इस कदम को 2027 के विधानसभा चुनावों के मद्देनजर चुनावी शिगूफा बताया है। उन्होंने कहा, “अगर सरकार वास्तव में जनहित में नए जिले बनाना चाहती थी तो कार्यकाल की शुरुआत में यह काम कर देती। चुनाव नजदीक आने पर ऐसा करना मंशा पर सवाल खड़े करता है।” उन्होंने जनगणना प्रक्रिया के चलते प्रशासनिक और राजस्व सीमाएं फ्रीज होने का हवाला देते हुए टाइमिंग पर भी सवाल उठाया। ठाकुर ने कहा, “कांग्रेस चाहे 68 जिले बना ले, फर्क नहीं पड़ने वाला। लोग इस शिगूफे को समझ चुके हैं।”
सुक्खू ने आरोप खारिज करते हुए कहा कि सरकार चुनौतियों का सामना करने के लिए तैयार है और अंतिम फैसला पूरी तरह आयोग की सिफारिशों पर निर्भर करेगा। विपक्ष ने इस घोषणा को चुनावी गारंटियों और पिछली भाजपा सरकार की कई कल्याणकारी योजनाओं को बंद करने से भी जोड़कर देखा है।
इसके अलावा सुक्खू ने संकेत दिया कि सरकार के चार साल पूरे होने से पहले मंत्रिमंडल विस्तार होने की संभावना है। उन्होंने यह भी पुष्टि की कि उन्हें और विधानसभा अध्यक्ष विनय कुमार को दिल्ली में इंडिया गठबंधन की बड़ी रैली में आमंत्रित किया गया है, जो मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) पर केंद्रित है।








