मुख्य बिंदु :
-
मनसुख मांडविया ने हिमाचल के नशामुक्त अभियान को समर्थन का आश्वासन दिया।
-
ESIC को नशा विरोधी पहल से जोड़ा जाएगा।
-
राज्यपाल शुक्ल का अभियान ग्रामीण स्तर तक पहुंचा।
-
हिमाचल का मॉडल देशभर में नशा विरोधी पहल को प्रेरित करेगा।
मांडविया ने हिमाचल के नशामुक्त आंदोलन को मजबूत करने का संकल्प लिया
27 जून 2025 को, केंद्रीय श्रम, रोजगार, युवा मामले और खेल मंत्री मनसुख मांडविया ने राजभवन में हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ल से मुलाकात की। सांसद एन.के. प्रेम चंद और कर्मचारी राज्य बीमा निगम (ESIC) के सदस्य उनके साथ थे।
27 जून 2025 को, केंद्रीय श्रम, रोजगार, युवा मामले और खेल मंत्री मनसुख मांडविया ने राजभवन में हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ल से मुलाकात की। सांसद एन.के. प्रेम चंद और कर्मचारी राज्य बीमा निगम (ESIC) के सदस्य उनके साथ थे।
मांडविया ने नशामुक्ति अभियान और श्रमिक कल्याण योजनाओं पर चर्चा की और राज्यपाल को शॉल, टोपी और स्मृति चिन्ह भेंट किया। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नशा तस्करी रोकने की दृष्टि से अभियान की सराहना की। मांडविया ने अपने मंत्रालय से पूर्ण समर्थन का आश्वासन दिया और घोषणा की कि ESIC नशा विरोधी पहल शुरू करेगा। उन्होंने कहा, “हिमाचल का मॉडल प्रेरणादायक है, और इसे राष्ट्रीय स्तर पर अपनाया जाएगा।” यह अभियान अब पंचायत स्तर तक पहुंच गया है, जो नशे के खिलाफ जनता की बढ़ती भागीदारी को दर्शाता है।
राज्यपाल शुक्ल ने बताया कि पीएम मोदी की प्रेरणा से शुरू हुआ नशामुक्त अभियान अब जन आंदोलन बन चुका है। अभिभावक और नागरिक स्वयं नशा संबंधी गतिविधियों की सूचना दे रहे हैं, और जनप्रतिनिधि जागरूकता बढ़ाने में सक्रिय हैं। हिमाचल में सिंथेटिक ड्रग्स की समस्या गंभीर है, लेकिन अभियान की बहुस्तरीय संरचना ग्रामीण क्षेत्रों तक पहुंच गई है।
शुक्ल ने कोविड-19 के दौरान मांडविया के जन कल्याण कार्यों की सराहना की। उन्होंने जिलों में चल रहे जागरूकता अभियानों और राज्य सरकार की पहलों की जानकारी साझा की। बैठक में केंद्र और राज्य के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे। मांडविया ने कहा, “राज्यपाल का अनुभव हिमाचल को नशामुक्त भविष्य की ओर ले जा रहा है।” ESIC को अभियान से जोड़कर, मंत्रालय युवाओं को सशक्त बनाने और देशभर में नशे को रोकने के लिए हिमाचल के मॉडल को अपनाएगा।








