भाखड़ा -नंगल बाँध पर नहीं चलेगी पंजाब सरकार की दादागिरी, हाई कोर्ट का आदेश

पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट ने पंजाब राज्य और उसके अधिकारियों, जिसमें पुलिसकर्मी भी शामिल हैं, को भाखड़ा नांगल डैम और लोहंड नियंत्रण कक्ष जल नियंत्रण कार्यालयों के दैनिक कार्य, संचालन और नियमन में हस्तक्षेप करने से रोक दिया है। ये कार्यालय भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड (बीबीएमबी) द्वारा संचालित किए जाते हैं।

कोर्ट ने साथ ही पंजाब राज्य को निर्देश दिया कि वह 2 मई को केंद्रीय गृह सचिव की अध्यक्षता में हुई बैठक में लिए गए निर्णय का पालन करे, जिसमें हरियाणा की तत्काल आवश्यकता को पूरा करने के लिए आठ दिनों की अवधि में 4,500 क्यूसेक अतिरिक्त पानी छोड़े जाने का निर्णय लिया गया था।

मुख्य न्यायाधीश शील नागू और न्यायमूर्ति सुमीत गोयल की खंडपीठ ने टिप्पणी की कि कानूनी ढांचा, विशेष रूप से भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड नियम, 1974, किसी भी असहमति की स्थिति में एक वैकल्पिक वैधानिक उपाय प्रदान करता है।

खंडपीठ ने कहा, “यदि पंजाब राज्य बीबीएमबी द्वारा लिए गए किसी निर्णय से सहमत नहीं है, तो वह 1974 के नियमों के नियम 7 के स्पष्टीकरण-द्वितीय के तहत बीबीएमबी के अध्यक्ष के माध्यम से केंद्र सरकार के समक्ष प्रस्तुति देकर अपनी आपत्ति दर्ज करा सकता है।” साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया कि पंजाब द्वारा ऐसी कोई प्रस्तुति नहीं दी गई थी।

कोर्ट ने आगे कहा कि पंजाब राज्य को उचित रूप से केंद्र सरकार के समक्ष प्रस्तुति देनी चाहिए थी, लेकिन उसने ऐसा नहीं किया। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि पंजाब को भाखड़ा नांगल डैम और बीबीएमबी कर्मियों को सुरक्षा प्रदान करने की पूरी स्वतंत्रता है, लेकिन वह बीबीएमबी के दैनिक संचालन में हस्तक्षेप नहीं कर सकता ताकि भाखड़ा डैम और जल से संबंधित कार्यों के प्रबंधन और संचालन में बाधा उत्पन्न हो।

यह मामला तब सामने आया जब बीबीएमबी ने पंजाब पुलिस द्वारा उसके कार्यों में हस्तक्षेप का आरोप लगाया। इस पर गंभीर टिप्पणी करते हुए खंडपीठ ने कहा, “यदि बीबीएमबी का यह आरोप सही है, तो बीबीएमबी के प्रबंधन और कार्यप्रणाली में हस्तक्षेप के लिए पुलिस बल की तैनाती को सराहा नहीं जा सकता।”

कोर्ट ने अपने विस्तृत आदेश में भारत सरकार के अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल सत्य पाल जैन की उस प्रस्तुति का उल्लेख किया, जिसमें उन्होंने बताया कि 2 मई को केंद्रीय गृह सचिव द्वारा एक बैठक बुलाई गई थी। इसमें केंद्र, बीबीएमबी और पंजाब, हरियाणा तथा राजस्थान जैसे सहभागी राज्यों के वरिष्ठ अधिकारियों ने भाग लिया था।

इस बैठक में यह निर्णय लिया गया था कि बीबीएमबी हरियाणा को आठ दिनों के लिए 4,500 क्यूसेक अतिरिक्त पानी छोड़ेगा ताकि उसकी तत्काल आवश्यकताओं को पूरा किया जा सके। साथ ही यह सहमति बनी थी कि डैम भरने की अवधि के दौरान पंजाब की अतिरिक्त आवश्यकताओं की पूर्ति कर बीबीएमबी उसकी भरपाई करेगा।

बीबीएमबी की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता राजेश गर्ग पेश हुए। पंजाब की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता गुरमिंदर सिंह और महाधिवक्ता मनिंदरजीत सिंह बेदी ने पैरवी की। हरियाणा की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता प्रविंदर सिंह चौहान, अतिरिक्त महाधिवक्ता दीपक बल्यान और नवीन एस. भारद्वाज के साथ पेश हुए।

भारत सरकार की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल सत्य पाल जैन वरिष्ठ वकील धीरेज जैन के साथ उपस्थित रहे।

 

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