समाचार सार
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महत्वपूर्ण कदम: हिमाचल सरकार ने स्वच्छ और हरित राज्य के लिए कई पहल शुरू कीं।
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पर्यावरण संरक्षण: प्लास्टिक बोतलों पर प्रतिबंध, सौर ऊर्जा, और ई-वाहनों को बढ़ावा।
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नवोन्मेषी तकनीक: ‘प्लास्टिक चैलेंजिंग मोबाइल ऐप’ से डिजिटल चालान, कागज रहित प्रक्रिया।
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स्वच्छता अभियान: ‘स्वच्छ शहर-समृद्ध शहर’ कार्यक्रम में 2.5 लाख घरों तक जागरूकता।
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शिक्षा और जागरूकता: 6 लाख स्कूली बच्चों को स्टील की बोतलें, वन संरक्षण पर जोर।
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लक्ष्य 2026: हिमाचल को 31 मार्च 2026 तक हरित ऊर्जा राज्य बनाने का लक्ष्य।
शिमला: हिमाचल प्रदेश सरकार ने पिछले ढाई वर्षों में स्वच्छ और हरित राज्य बनाने के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू के नेतृत्व में, पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास को बढ़ावा देने के लिए नीतियां लागू की गई हैं, जिनके सकारात्मक परिणाम सामने आ रहे हैं।
सरकार ने 500 मिलिलीटर की प्लास्टिक बोतलों पर प्रतिबंध लगाया, सौर ऊर्जा के उपयोग को बढ़ावा दिया, हरित परिवहन गलियारे विकसित किए, और पारंपरिक ईंधन वाहनों के बजाय ई-वाहनों को प्रोत्साहन दिया। इसके अलावा, ‘स्वच्छ शहर-समृद्ध शहर’ अभियान और ग्रीन स्कूल कार्यक्रम जैसे कदम हिमाचल को 31 मार्च 2026 तक हरित ऊर्जा राज्य बनाने के लक्ष्य को गति दे रहे हैं।
मुख्यमंत्री ने स्कूली बच्चों में पर्यावरण जागरूकता बढ़ाने के लिए 6,00,000 स्टेनलेस स्टील की बोतलें वितरित करने की घोषणा की, ताकि प्लास्टिक बोतलों का उपयोग कम हो। साथ ही, सरकारी और निजी होटलों सहित सभी सरकारी आयोजनों में पॉलीथीन टेरेफ्थेलेट (पीईटी) बोतलों पर प्रतिबंध लागू किया गया है, जो हिमाचल को प्लास्टिक-मुक्त बनाने में मदद करेगा।
‘प्लास्टिक चैलेंजिंग मोबाइल ऐप’ की शुरुआत पर्यावरण कानूनों को डिजिटल रूप से लागू करने की दिशा में एक नवाचार है। यह ऐप 13 विभागों के अधिकारियों को मोबाइल से चालान जारी करने की सुविधा देता है, जिससे कागजी प्रक्रियाएं खत्म होंगी। इसके अतिरिक्त, वन संरक्षण के लिए ग्राम वन प्रबंधन सोसाइटी को सम्मानित किया जा रहा है, और युवाओं से इस आंदोलन में हिस्सा लेने का आह्वान किया गया है।
5 फरवरी को शुरू हुआ ‘स्वच्छ शहर-समृद्ध शहर’ अभियान दो महीने तक चला, जिसमें 962 स्वयं सहायता समूहों, 14 गैर-सरकारी संगठनों, और 85 स्कूलों के छात्रों ने हिस्सा लिया। स्वयंसेवकों ने 2.5 लाख घरों का दौरा कर स्वच्छता के प्रति जागरूकता फैलाई और वार्ड स्तर पर समाधान शिविर आयोजित किए। इस अभियान ने न केवल स्वच्छता को बढ़ावा दिया, बल्कि ऑनलाइन नागरिक सेवा पोर्टल के माध्यम से 9 आवश्यक डिजिटल सेवाओं को भी प्रचारित किया।
मुख्यमंत्री ने विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन पर जोर देते हुए कहा कि सामुदायिक भागीदारी और नवाचार से हिमाचल एक सुरक्षित, समृद्ध, और हरित भविष्य की ओर अग्रसर है।








