किसान नेताओं के खिलाफ पंजाब सरकार की बड़ी कार्रवाई

किसान नेताओं के खिलाफ पंजाब सरकार की बड़ी कार्रवाई

चंडीगढ़, 20 मार्च 2025 – पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान की सरकार ने प्रदर्शनकारी किसानों पर सख्त कार्रवाई शुरू की। इससे राज्य भर में गुस्सा भड़क गया है। 19 मार्च को पंजाब पुलिस ने शंभू और खनौरी सीमाओं पर विरोध शिविरों को तोड़ दिया। कई किसान नेताओं को हिरासत में लिया गया। अस्थायी संरचनाएं ढह गईं। रातोंरात तंबू गायब हो गए। यह कार्रवाई फरवरी 2024 से लगे नाकाबंदी को हटाने के लिए थी। तब से किसान न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) की कानूनी गारंटी मांग रहे हैं।

शंभू और खनौरी से किसानों को हटाया

पुलिस तेजी से आगे बढ़ी। हजारों अधिकारी सीमाओं पर तैनात किए गए। उन्होंने शंभू और खनौरी से किसानों को हटाया। गैस सिलेंडर, एयर कंडीशनर और निजी सामान जब्त होने की खबरें आईं। किसान नेताओं ने चोरी का आरोप लगाया। एक प्रदर्शनकारी ने द हिंदू को बताया, “वे बिना सूचना आए।” संयुक्त किसान मोर्चा (SKM) और किसान मजदूर मोर्चा ने इसकी निंदा की। उन्होंने जवाब में उपायुक्त कार्यालयों के बाहर धरने की घोषणा की।

किसान नेताओं के खिलाफ करवाई से राजनितिक तूफ़ान

विपक्षी नेताओं ने हमला बोला। कांग्रेस सांसद चरणजीत सिंह चन्नी ने मान पर गृह मंत्री अमित शाह से साठगांठ का आरोप लगाया। चन्नी ने X पर कहा, “दिल्ली में तैयारी हुई।” शिरोमणि अकाली दल की हरसिमरत कौर बादल ने मान को अस्थिर बताया। हिंदुस्तान टाइम्स से उन्होंने कहा, “उनका मानसिक संतुलन खो गया।” KMSC के सतनाम सिंह पन्नू ने कहा, “यह लोकतांत्रिक अधिकारों की हत्या है।” उन्होंने AAP और BJP को जिम्मेदार ठहराया।

हरपाल सिंह चीमा ने मान का समर्थन किया

मान अडिग रहे। मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने उनका समर्थन किया। चीमा ने कहा, “हम सीमाएं खोलना चाहते हैं।” मान 3 मार्च को SKM नेताओं से बैठक छोड़कर चले गए थे। बाद में उन्होंने किसानों पर पंजाब को “प्रदर्शन राज्य” बनाने का आरोप लगाया। इंडिया टुडे के अनुसार, उन्होंने कहा, “मैं तीन करोड़ लोगों का संरक्षक हूं।” आलोचकों ने इसे पाखंड बताया।

किसान डटे हुए हैं। SKM ने 5 मार्च को मान के पुतले जलाए। पिछले हफ्ते AAP विधायकों के घरों पर प्रदर्शन हुए। एक किसान ने द इंडियन एक्सप्रेस को बताया, “मान ने हमें धोखा दिया।” हरियाणा ने 20 मार्च को अपनी बैरिकेडिंग हटानी शुरू की। लेकिन पंजाब में अशांति बढ़ रही है।

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