पालमपुर का यूट्यूबर ब्लैकमेलिंग के आरोप में गिरफ्तार !

amir chand dogra

हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले में राज्य सतर्कता और भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो ने ‘ए स्टार न्यूज़’ यूट्यूब चैनल के मालिक अमीर चंद डोगरा को पालमपुर में ₹2 लाख की उगाही करते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार किया। डोगरा ने भुवनेश चंद सूद को एक जमीन खरीद से संबंधित वीडियो क्लिप के जरिए उनकी छवि खराब करने की धमकी दी थी।

धरमशाला में सतर्कता ब्यूरो ने उनके खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 308(2) के तहत मामला दर्ज किया। आश्चर्यजनक रूप से, डोगरा का यूट्यूब चैनल केवल तीन वीडियो और 22 सब्सक्राइबर्स वाला है, जो दर्शाता है कि छोटे स्तर के चैनल भी गंभीर अपराधों में लिप्त हो सकते हैं। यह मामला हिमाचल में सोशल मीडिया के दुरुपयोग और येलो जर्नलिज्म की बढ़ती समस्या को उजागर करता है, जहाँ कुछ लोग पत्रकारिता की आड़ में उगाही और ब्लैकमेलिंग कर रहे हैं।

हिमाचल में बढ़ने लगा है पत्रकारिता के नाम पर ब्लैकमेलिंग का धंधा

इससे पहले, 10 जुलाई, 2024 को सतर्कता विभाग को दो अन्य व्यक्तियों, मृत्युंजय पुरी और राकेश कुमार, के खिलाफ शिकायत मिली थी, जो ‘खबर आज तक’ और ‘खबर अजब गजब’ नामक यूट्यूब चैनल चलाते थे। इन चैनलों की प्रामाणिकता की जाँच की जा रही है, क्योंकि इनके नाम स्थापित मीडिया हाउस से मिलते-जुलते हैं, जो जानबूझकर गलत बयानी का संकेत देता है। सतर्कता विभाग ने एक जाल बिछाकर दोनों को ₹25,000 नकद और ₹25,000 के चेक के साथ पकड़ा।

धरमशाला पुलिस स्टेशन में धारा 308(2) और 3(5) BNS के तहत FIR दर्ज की गई, और उगाही में इस्तेमाल वाहन को भी जब्त कर लिया गया। सहायक पुलिस आयुक्त (एसीपी) सिंह ने बरामद राशि की पुष्टि की और बताया कि जाँच जारी है। दोनों आरोपियों को रिमांड के लिए अदालत में पेश किया गया।

यह ऑपरेशन हिमाचल में भ्रष्टाचार और अवैध गतिविधियों को रोकने के लिए सतर्कता ब्यूरो की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। सतर्कता टीम ने पालमपुर में डोगरा को पकड़ने के लिए सावधानीपूर्वक योजना बनाई, जिससे वह उगाही के दौरान रंगे हाथों पकड़ा गया। जुलाई 2024 में पुरी और कुमार की गिरफ्तारी में वाहन की जब्ती से पता चलता है कि जाँच में अपराधियों के संसाधनों को निशाना बनाया जा रहा है। ये मामले डिजिटल मीडिया के अनियंत्रित प्रसार को रेखांकित करते हैं, जहाँ कम सब्सक्राइबर्स वाले चैनल भी ब्लैकमेलिंग के लिए सोशल मीडिया की कथित शक्ति का दुरुपयोग करते हैं।

मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुखु भी लगा चुके हैं ब्लैकमेलिंग के इलज़ाम

मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने विधानसभा में बद्दी  और शिमला में कुछ सोशल मीडिया पत्रकारों द्वारा ब्लैकमेलिंग की बात उठाई थी। उनकी टिप्पणियाँ इस व्यापक समस्या की ओर इशारा करती हैं, जहाँ डिजिटल प्लेटफॉर्म की सुलभता का फायदा उठाकर लोग पत्रकार बनकर उगाही करते हैं। हिमाचल में हाल के वर्षों में दर्जनों सोशल मीडिया चैनल उभरे हैं। इनमें से कई ने स्थानीय मुद्दों को उजागर कर महत्वपूर्ण योगदान दिया है, जैसे ब्रेकिंग न्यूज़ और सामाजिक समस्याओं पर चर्चा। हालांकि, कुछ चैनल येलो जर्नलिज्म में लिप्त हैं, जो सनसनीखेज सामग्री और धमकियों के जरिए व्यक्तियों और व्यवसायों से पैसे वसूलते हैं। डोगरा का मामला इसका स्पष्ट उदाहरण है, जहाँ एक छोटा चैनल ₹2 लाख की उगाही की कोशिश में पकड़ा गया।

ये गिरफ्तारियाँ डिजिटल मीडिया के नियमन की चुनौतियों को सामने लाती हैं। पालमपुर जैसे छोटे शहरों में, जहाँ पीड़ितों के पास ऐसी धमकियों का सामना करने के लिए सीमित संसाधन हैं, यह समस्या गंभीर है। डिजिटल युग में कोई भी व्यक्ति स्मार्टफोन और इंटरनेट के साथ चैनल शुरू कर सकता है, जिससे ब्लैकमेलिंग के अवसर बढ़ गए हैं। सरकार को वास्तविक पत्रकारिता को बढ़ावा देने और अपराधियों पर नकेल कसने की दोहरी जिम्मेदारी निभानी है। मुख्यमंत्री सुक्खू ने इस मुद्दे पर कड़ा रुख अपनाने का संकल्प जताया है, लेकिन प्रभावी नियमन के लिए ठोस नीतियों की जरूरत है।

जनता ने इन गिरफ्तारियों का स्वागत किया है, लेकिन प्रामाणिक सोशल मीडिया पत्रकारों के बदनाम होने की चिंता भी व्यक्त की है। सामुदायिक नेताओं और मीडिया निगरानी समूहों ने डिजिटल न्यूज़ चैनलों के लिए अनिवार्य पंजीकरण और उगाही या ब्लैकमेलिंग के लिए सख्त दंड की माँग की है। यह भी सुझाव दिया गया है कि प्रामाणिक और फर्जी चैनलों को अलग करने के लिए स्पष्ट दिशानिर्देश बनाए जाएँ। पालमपुर और धरमशाला के मामलों ने इस मुद्दे को और गंभीर बना दिया है, क्योंकि ये छोटे स्तर के चैनल भी बड़े पैमाने पर नुकसान पहुँचा सकते हैं।

जाँच के दौरान और जानकारी सामने आने की उम्मीद है। डोगरा, पुरी, और कुमार के मामलों में अदालती कार्यवाही निकट से देखी जाएगी, क्योंकि ये भविष्य में ऐसे अपराधों से निपटने के लिए मिसाल कायम कर सकती हैं। सतर्कता ब्यूरो और पुलिस की सक्रियता से हिमाचल में कानून-व्यवस्था बनाए रखने की प्रतिबद्धता झलकती है। ये मामले पत्रकारिता की साख को बनाए रखने और डिजिटल मीडिया के दुरुपयोग को रोकने की जरूरत को रेखांकित करते हैं। हिमाचल जैसे पर्यटक-प्रधान राज्य में, जहाँ सामाजिक और आर्थिक गतिविधियाँ सोशल मीडिया से प्रभावित होती हैं, यह सुनिश्चित करना महत्वपूर्ण है कि पत्रकारिता जनहित में हो, न कि व्यक्तिगत लाभ के लिए।

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