हुड्डा ने कहा, कर्मचारी चाहते हैं OPS, सरकार थोप रही UPS

मुख्य बिंदु
  • हुड्डा ने बीजेपी पर कर्मचारियों पर UPS थोपने का आरोप लगाया।
  • कर्मचारी OPS की मांग कर रहे हैं, जो गारंटीशुदा पेंशन देता है।
  • UPS में कर्मचारियों को वेतन का 10% योगदान देना पड़ता है।
  • 30 लाख केंद्रीय कर्मचारियों में केवल 20,000 ने चुना UPS।

हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने बीजेपी सरकार पर कर्मचारियों की सामाजिक सुरक्षा को कमजोर करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि सरकार बिना चर्चा के यूनिफाइड पेंशन स्कीम (UPS) थोप रही है, जबकि कर्मचारी ना तो UPS चाहते हैं और ना ही नेशनल पेंशन स्कीम (NPS)। उनकी मांग केवल पुरानी पेंशन स्कीम (OPS) है।

OPS अंतिम मूल वेतन का 50% पेंशन सुनिश्चित करता है और इसमें स्वचालित महंगाई भत्ता (DA) समायोजन शामिल है। इसके विपरीत, UPS में कर्मचारियों को अपने वेतन का 10% योगदान देना पड़ता है, जो रिटायरमेंट या मृत्यु पर वापस नहीं मिलता। हुड्डा ने कहा, “सरकार कर्मचारियों के अधिकार छीन रही है।” उन्होंने सरकार से कर्मचारियों की मांगों को प्राथमिकता देने की अपील की। हरियाणा कैबिनेट ने हाल ही में केंद्र की तर्ज पर UPS अपनाया, लेकिन कर्मचारी इससे असंतुष्ट हैं।

 

कर्मचारियों की OPS की मांग को दर्शाता है UPS का कम स्वीकार
आंकड़ों के अनुसार, 1 अप्रैल से 30 जून 2025 तक 30 लाख केंद्रीय कर्मचारियों में से केवल 20,000 ने UPS चुना, जो कर्मचारियों के विरोध को दर्शाता है। कर्मचारी OPS को प्राथमिकता देते हैं, क्योंकि इसमें कोई योगदान नहीं देना पड़ता और निश्चित पेंशन मिलती है।

UPS में 25 साल की सेवा और कई शर्तें पूरी करने पर ही 50% पेंशन मिलती है। यदि कर्मचारी की रिटायरमेंट के पांच साल के भीतर मृत्यु हो जाती है, तो UPS के तहत उनका योगदान उनके नामांकित व्यक्तियों को नहीं मिलता। हुड्डा ने कहा कि UPS कर्मचारियों की जरूरतों को नजरअंदाज करता है। “OPS केवल मांग नहीं, बल्कि सुरक्षित रिटायरमेंट के लिए जरूरी है,” उन्होंने कहा। OPS लागू करके सरकार कर्मचारियों की सामाजिक सुरक्षा सुनिश्चित कर सकती है।

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