मुख्य बिंदु:
- तेज बारिश ने हिमाचल में घरों, सड़कों और बिजली व्यवस्था को नुकसान पहुंचाया।
- 39 लोग मारे गए, 4 लापता, राहत कार्य जारी हैं।
- सरकार ने भारी बारिश के लिए ऑरेंज अलर्ट जारी किया है।
- कुल्लू और कांगड़ा सबसे ज्यादा प्रभावित क्षेत्र बने।
हिमाचल प्रदेश में तेज बारिश ने भारी तबाही मचाई है, जिससे ढांचागत कमजोरियां सामने आईं। कुल्लू में बादल फटने से 15 घर बह गए और सड़कें टूट गईं।
कांगड़ा में 20 घरों को नुकसान पहुंचा, जिससे 39 लोगों की मौत हुई और 4 लापता हैं। बिजली लाइनें क्षतिग्रस्त हो गईं, जिससे हजारों लोग अंधेरे में हैं। स्थानीय प्रशासन ने राहत शिविर शुरू किए, लेकिन पहाड़ी इलाकों में पहुंच मुश्किल बनी हुई है। मौसम विभाग ने पुष्टि की कि भारी बारिश ने नदियों को उफान पर ला दिया। लोग डरे हुए हैं और सरकार से त्वरित सहायता मांग रहे हैं। यह घटना हिमाचल के पुराने ढांचे की असुरक्षा को दर्शाती है, जो बारिश का सामना नहीं कर पाया।नुकसान का आकलन जारी है। विशेषज्ञों का कहना है कि मजबूत सड़कों की जरूरत है। स्थिति पर नजर रखना जरूरी है।
बारिश ने हिमाचल में 39 लोगों की जान ली
तेज बारिश ने हिमाचल में 39 लोगों की जान ली, जिनमें ज्यादातर कुल्लू और कांगड़ा के निवासी हैं। चार लोग अभी भी लापता हैं, जिनकी तलाश बचाव टीमें कर रही हैं। कुल्लू में एक परिवार के पांच सदस्य मलबे में दब गए, जबकि कांगड़ा में दो बच्चे बह गए। राहत कार्य में सेना और एनडीआरएफ की टीमें शामिल हैं, लेकिन पहाड़ी रास्तों की खराब हालत बाधा बनी हुई है।
मृतकों के परिवार शवों की पहचान के लिए इंतजार कर रहे हैं। मौसम विभाग ने चेतावनी दी कि 5 जुलाई तक भारी बारिश जारी रहेगी। स्थानीय लोग कहते हैं कि बाढ़ ने उनकी जिंदगी तबाह कर दी। यह संकट हिमाचल के निवासियों के लिए गहरा दुख लेकर आया है।उम्मीदें कमजोर पड़ रही हैं। सरकार को तुरंत कदम उठाने चाहिए। बचाव कार्य में तेजी लाना जरूरी है।
अलर्ट और राहत का प्रयासहिमाचल सरकार ने भारी बारिश के खतरे को देखते हुए 5 जुलाई तक ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। मौसम विभाग ने शिमला और मंडी में 100 मिमी से अधिक बारिश की भविष्यवाणी की है, जिससे फ्लैश फ्लड का जोखिम बढ़ गया है।
प्रभावित परिवारों के लिए 5 लाख रुपये मुआवजा
मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने राहत कार्य तेज करने का आदेश दिया और सेना से मदद मांगी। सरकार ने प्रभावित परिवारों के लिए 5 लाख रुपये मुआवजा घोषित किया है। राहत शिविरों में खाना और दवाएं पहुंचाई जा रही हैं, लेकिन सड़कों के बंद होने से वितरण धीमा है। स्थानीय लोग सरकार की तैयारियों पर सवाल उठा रहे हैं। यह अलर्ट हिमाचल को सुरक्षित रखने के लिए त्वरित कार्रवाई की मांग करता है।








