निजी अस्पतालों की मनमर्जी का शिकार आयुष्मान भारत के लाभार्थी :सैलजा

  • योजना कागजी और प्रचार तक सीमित।
  • निजी अस्पतालों की मनमानी, इलाज से इंकार।
  • आवश्यक इलाज जैसे मोतियाबिंद, पित्त की थैली ऑपरेशन योजना से बाहर।
  • सड़क दुर्घटना के घायलों को इलाज नहीं।
  • सरकार के मुफ्त इलाज के दावे खोखले।
  • योजना की समीक्षा और पारदर्शी निगरानी की मांग।
  • कांग्रेस का विफल योजनाओं का विरोध।

अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी की महासचिव, पूर्व केंद्रीय मंत्री और सिरसा की सांसद कुमारी सैलजा ने केंद्र सरकार की आयुष्मान भारत योजना की कड़ी आलोचना की है। उन्होंने इसे कागजी और प्रचार तक सीमित बताते हुए कहा कि यह योजना जमीनी स्तर पर आम जनता के लिए लाभकारी नहीं है।

 

कुमारी सैलजा ने मीडिया को जारी बयान में कहा कि आयुष्मान भारत योजना के दावे हकीकत से कोसों दूर हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार इस योजना के प्रचार के जरिए जनता को गुमराह कर रही है। कई निजी अस्पताल, जो इस योजना से जुड़े हैं, मनमानी कर रहे हैं। कुछ अस्पताल उपचार देने से इंकार कर देते हैं, तो कुछ सर्वर की समस्या का हवाला देकर मरीजों को लौटा देते हैं। इससे गरीब मरीजों को नकद भुगतान कर इलाज करवाना पड़ रहा है।

 

सांसद ने बताया कि मोतियाबिंद, पित्त की थैली और बच्चेदानी के ऑपरेशन जैसे जरूरी इलाज इस योजना के दायरे से बाहर कर दिए गए हैं। इसके अलावा, कई निजी अस्पताल सड़क दुर्घटनाओं में घायल मरीजों को भी इलाज देने से मना कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि सरकार मुफ्त इलाज का दावा करती है, लेकिन अस्पतालों में मरीजों को बहानेबाजी और टालमटोल का सामना करना पड़ता है, जो गरीबों के साथ अन्याय है।

 

कुमारी सैलजा ने सरकार से मांग की है कि आयुष्मान भारत योजना की तत्काल समीक्षा की जाए। उन्होंने सुझाव दिया कि निजी अस्पतालों की जवाबदेही तय की जाए, बाहर किए गए रोगों को फिर से योजना में शामिल किया जाए और योजना की निगरानी के लिए एक पारदर्शी तंत्र स्थापित किया जाए। उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी गरीबों और आम जनता की आवाज बनकर ऐसी विफल योजनाओं का विरोध करती रहेगी।

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